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Contributions of Yoga in life – योग का जीवन में योगदान

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Contributions of Yoga in life

योग का जीवन में योगदान

योग का हर तरफ शोर है। सब योग कर रहे हैं। भारत ही नहीं दुनिया के हर देश में योग हो रहा  है। भारतीय जीवन शैली के इस अद्भुत रंग में ऐसा क्या छिपा है कि सभी उसे पाना चाहते हैं।

Yoga is in the air. We all are interested in doing Yoga, not only in India but in all other countries of the world. It arouses curiosity about Indian lifestyle which gifts Yoga to us.

योग एक विज्ञान है, जिसके नियम धर्म, जाति, रंग, क्षेत्र से बंधे हुए नहीं हैं। भौतिक विज्ञान के नियमों की तरह ही योग पर भी सूक्ष्म विज्ञान के नियम लागू होते हैं। योग के लिए इस सूक्ष्म विज्ञान के नियमों को पहली बार लगभग दो हजार साल पहले महर्षि पंतजलि ने सूत्रबद्ध किया था।



Yoga is a science and rules are applicable everywhere beyond the narrow boundaries of religion, caste, colour and region. Just like rules of physical science, rules of subtle (spiritual) science is applicable to Yoga. About two thousand years ago Mahirshi Patanjali codified the rules of Yoga, which is known as Yogasutra.

महर्षि पंतजलि का कहना है कि

  • योग मन की समाप्ति है.
  • योग मन को शान्त रखने का एक अभ्यास है.
  • योग मन के भ्रमों की समाप्ति है.
  • योग मन के उतार – चढ़ाव की स्थिरता है.
  • एक मन सभी परेशानियों से मुक्त योग है.

About Yoga, Mahirshi Patanjali says-

  • Yoga is the silence of Mind
  • Yoga is a process to silent the Mind
  • Yoga ends illusions in the Mind
  • Yoga is stability during thought process
  • Ultimately, Yoga frees mind from all distractions.

 

श्रीमदभागवत् गीता में श्रीकृष्ण, अर्जुन को योग का मतलब समझाते हुए कहते हैं-

On a similar pattern, Lord Krishna clears meaning of Yoga to Arjun in Srimad Bhagwat Gita

चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्‌ । तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्‌ ॥

क्योंकि हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल, प्रमथन स्वभाव वाला, बड़ा दृढ़ और बलवान है। इसलिए उसको वश में करना मैं वायु को रोकने की भाँति अत्यन्त दुष्कर मानता हूँ॥34॥

This mind is very powerful, naughty and with bigger commitment so it is the most difficult to control just like air.

श्रीभगवानुवाच असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्‌ । अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ॥

श्री भगवान बोले- हे महाबाहो! निःसंदेह मन चंचल और कठिनता से वश में होने वाला है। परन्तु हे कुंतीपुत्र अर्जुन! यह और वैराग्य से वश में होता है॥35॥

Yes, this mind is the most powerful and it is no doubt that it comes under control with great effort but it comes under your control with measures of austerity (first negation of non- essentials than essentials)

 

योग की पहली सीढ़ी आसन हैं। 21 जून को विश्व योग दिवस पर विश्व के हर देश के लोग विभिन्न प्रकार के इन आसनों को करते हैं। आसन से हम अपने शरीर को रोगमुक्त और अपने मन के अनुकूल बना लेते हैं। आसन करने में महिर लोगों के शरीर उनके विचारों के साथ साथ चलते हैं, जैसा वे चाहते हैं, वैसा वे अपने शरीर के साथ कर लेते हैं।

Different kinds of Asanas are first step of Yoga. World Yoga Day on June 21st people around the world do different Asanas of Yoga. These Asanas makes one body free from disease and provides mental strength to move body parts according to our thought.

इस सीढ़ी के बाद मन यानि विचारों के प्रवाह यानि सोच का इच्छानुसार प्रबंधन करना, योग में अगला कदम होता है। मन यानि विचारों के प्रवाह के ही प्रबंधन के नियमों के बारे में गीता में श्रीकृष्ण, अर्जुन को बताते हैं या महर्षि पंतजलि ने योगसूत्र में इन नियमों को लिखा है।

After Asanas, we learn in Yoga to manage our Thought process. Lord Krishna in SrimatBhagwat Gita and Mahrishi Patanjali in YogSutra has explained the rules of managing our thought process.

योग, भारतीय संस्कृति के केन्द्र में है। संस्कृति का मतलब होता है संस्कार करना या सुधारना, परिष्‍कृत करना। भारतीय संस्कृति में व्यक्ति में ही सुधार को हर समस्या का समाधान माना गया है और इसके लिए योग की तकनीक का उपयोग किया जाता है।



Yoga is at the centre of Bhartiya Sanskriti. Sanskriti aims to inculcate natural potential in an individual. Bhartiya Sanskriti stands on the firm assumption that solution of any problem can be achieved through able individuals and Yoga is a technique to develop such able individuals.

योग के जरिए व्यक्ति अपने शरीर और मन का इच्छानुसार प्रबंधन करके जीवन की हर परिस्थिति में आनंद देने वाला संतुलन स्थापित कर लेता है। इससे उसके हर एक काम में, बोल चाल की भाषा,  व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार में, शिष्‍टाचार , जीवन यापन के रंग ढंग, भौतिक उपलब्धियां, खान पान,  वस्त्रांलकार, आवास निवास, साहित्य, कला ,धर्म, दर्शन  आदि सभी में इच्छानुसार परिवर्तन सरलता और सुगमता से आ जाता है।

Through Yoga one can manage and balance the body and mind in any situation of life to get peace and bliss. Yoga makes life more blissful in every act and behaviour.




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