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त्रयंबकेश्वर मंदिर के दो पुजारियों पर इनकम टैक्स का छापा किन्तु मदरसों और मस्जिदों क्यों नहीं??

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त्रयंबकेश्वर मंदिर के दो पुजारियों पर इनकम टैक्स का छापा किन्तु मदरसों और मस्जिदों क्यों नहीं??




नोटबंदी पर काले धन की तलाश में आयकर विभाग की छापेमारी देश भर में चल रही है। महाराष्ट्र में नासिक के त्रयंबकेश्वर मंदिर के दो बड़े पुजारियों पर भी आयकर विभाग ने छापेमारी की है। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नासिक के त्रयंबकेश्वर मंदिर में देश-विदेश से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा पाठ के लिए ज्यादातर धन लेनदेन कैश में होता है।

नोटबंदी से पहले मंदिर के पुजारियों की आय पर कोई सवाल नहीं उठते थे, लेकिन नोटबंदी के बाद मंदिर के दो बड़े पुरोहित इनकम टैक्स विभाग के रडार पर आ गए हैं। दोनों पुरोहित गणपति शिखरे और निषाद चांदवडकर के यहां इनकम टैक्स विभाग ने छापेमारी की हुयी थी क्या बीजेपी सरकार हिन्दू और पुजारी विरोधी तो नहीं है केवल मंदिर के पुजारी ही इनके दायरे में आ रहे है मदरसों और मस्जिदों  के मोलवी नहीं क्यों? यह हिन्दू में काफी हलचल मचा रखा है ब्राह्मण समाज और सनातन प्रेमी इस सोच में पड गए है मोदी सरकार कौन से निति से सरकार चला रही है यह सरकार वोट बैंक के राजनीती में ब्राह्मण विरोधी वोट बैंक बनाने के चकर में तो नहीं पड़ा है न??




मोदी सरकार अब कांग्रेस, लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह की धर्मनिरपेक्षता से एक कदम आगे निकलती हुई महसूस हो रही है ।

इनकम टैक्‍स अधिकारियों के पास चर्चों, मदरसों और मस्जिदों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने का माद्दा नहीं है जहां धर्मांतरण की खातिर दूसरे मुल्‍कों से कालाधन आ रहा है। और 56″ इंच का कथित सीना, डर से या वोट के लालच वश इनपे कार्रवाई नहीं कर रहा ।

ज्यादा काबिल बनने के चक्कर में , ये सरकार भी कहीं अटल सरकार की तरह , —–डबूरा बूट (चना) लादने न चला जाये




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