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कभी ऋषि और ब्राह्मण बन लोग कपट करते थे आज दलित बन के समाज को पीड़ा देते है

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ऋषि और ब्राह्मण कौन है जिसे ज्ञान हो धर्म शास्त्र का वह ब्राह्मण और ऋषि है यस्क मुनि की निरुक्त के अनुसार – ब्रह्म जानाति ब्राह्मण: — ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म (अंतिम सत्य, ईश्वर या परम ज्ञान) को जानता है। अतः ब्राह्मण का अर्थ है – “ईश्वर का ज्ञाता”।




ब्राह्मण समाज का इतिहास प्राचीन भारत के वैदिक धर्म से आरंभ होता है। “मनु-स्मॄति” के अनुसार आर्यवर्त वैदिक लोगों की भूमि है,  ब्राह्मण व्यवहार का मुख्य स्रोत वेद हैं। ब्राह्मणों के सभी सम्प्रदाय वेदों से प्रेरणा लेते हैं

दलित और पिछड़ा कौन है जो गरीब है जो शिक्षा में कमजोर है तकनीकियों में कमजोर है  ना कि जो सवर्ण समाज और मनुवाद पर व्यंग कर के ब्राह्मण के खिलाफ वैमनस्यता या नफरत की बाते करे वो दलित और पिछड़ा समाज नहीं है 

दलित चिंतकों और नेताओं का ये कर्तव्य बनता है  कि  वो  दलित और पिछड़े समाज का उत्थान  सोचे.

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इतिहास में देखेंगे की ऋषि के भेष में कपटी लूट करते थे आज वाही हाल है दलित के भेष में ढोंगी दलित लूट करते है गरीब जनता को पीड़ा देते है राजाओ  को द्वारा ऋषि  को विशेष छुट था ऋषि को कोई बोल नहीं सकता था ठीक आजकल राजनेताओ का हाल कोई खुद को दलित कह दे उसे सभी सुबिधा मिल जायेगा उनका जाँच नहीं होता है की हकीकत में दलित है या नहीं है

—यह लेख लेखक का व्यक्तिगत विचार है




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