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राहुल का फटा कुर्ता है या कांग्रेस की फटेहाली है !!

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राहुल गाँधी जी शादी कर लो, फटा कुर्ता जनता को क्यों दिखा रहे हो- माई को दिखाओ, लुगाई लाओ

आपके जैसे कुछ बेरोजगार लोग अपने गाँव के लोगों को दर्द सुनाते हैं क्योंकि वो शादी के योग्य नहीं होते। मतलब अपने पैरों पर खड़ा नहीं होते। जब तक पैरों पर खड़ा नहीं होंगे, लुगाई को कैसे पालेंगे-पोसेंगे। बच्चे होंगे तो कौन देखेगा? तो इसी इंतजार में घर वाले शादी में लेट कर देते हैं कि पप्पू अपने पैरों पर अब खड़ा होंगे, तब खड़ा होंगे। एक गाँव में पप्पू का दोस्त राजू है। राजू छोटा है। पर वह शादीशुदा है।

इश्कमिजाज राजू कुर्ता फाड़ दौर से गुजर चुका है, बल्कि वह तो हद से गुजर चुका था। बाद में मम्मी-पापा ने मिलकर उसके सात फेरे करवा दिए। वही राजू भैया पप्पू को कुर्ता फाड़ आइडिया देता है। हद से गुजरने की सलाह भी वो दे चुका है। उस पर भी अमल जारी है लेकिन ये बात बहुत कम लोगों को मालूम है। अब पप्पू रोज अपना कुर्ता फाड़ने लगा। उसे धागे से सी देने बैठ जाता। मम्मा को अहसास दिलाता कि लुगाई की कमी खल रही है। दिल की व्यथा सुनाने की ये कथा मम्मा भली भांति समझ लेती है। आखिरकार राजू की युक्ति काम आ गयी। पप्पू के हाथ में लुगाई की लगाम आ गयी। अस्त-व्यस्त जीवन से अब मस्त जीवन में आ गया पप्पू। फिर कभी नहीं फटा कुर्ता। जान गये राहुलजी कुर्ता फटने का राज…या कि जानते समझते किसी राजू की सलाह पर उसी पप्पू जैसा किस्मत आजमा रहे थे राहुलजी।




 




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